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वायरल दावा झूठा है। WHO और भारत सरकार ने ऐसी एडवाइजरी से इनकार किया है; ताजा खाद्य-सुरक्षा आँकड़े वास्तविक हैं, लेकिन 87% कैंसर का अनुमान नहीं बताते।

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दावा: वायरल पोस्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि मिलावटी दूध के कारण भारत के 87% लोगों को कैंसर या कोई गंभीर बीमारी हो जाएगी।

फैसला: गलत। WHO ने ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की। भारत सरकार ने भी इस दावे को खारिज किया है। दूध में मिलावट खाद्य-सुरक्षा की वास्तविक समस्या हो सकती है, लेकिन 87% कैंसर का आँकड़ा प्रमाणित नहीं है।

60 सेकंड में पूरी बात

  • WHO के आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उसने भारत सरकार को दूध या दुग्ध-उत्पादों में मिलावट पर ऐसी कोई एडवाइजरी नहीं दी।
  • 19 जनवरी 2023 की PIB विज्ञप्ति ने इस रिपोर्ट को झूठा बताया और कहा कि इससे अनावश्यक डर फैल रहा था।
  • यह संख्या 2018 की एक मीडिया रिपोर्ट से जुड़ी पुरानी सामग्री में मिलती है और हर बार नया साल जोड़कर फिर साझा की जाती है।
  • फरवरी 2026 के सरकारी उत्तर के अनुसार 2024–25 में दूध और दुग्ध-उत्पादों के 33,405 नमूने जाँचे गए, 12,780 मानकों के अनुरूप नहीं थे और 12,057 मामले शुरू किए गए।
  • ये नियामकीय आँकड़े कैंसर की घटनाएँ नहीं हैं और इनसे 87% का राष्ट्रीय कैंसर-जोखिम नहीं निकाला जा सकता।
Timeline of the recycled WHO milk-cancer claim and institutional denials
Diagram The claim is recycled; the primary records do not support it. Source/credit: HeadlineDecoded conceptual graphic

WHO ने वास्तव में क्या कहा?

WHO के प्रकाशित स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उसने “भारत सरकार को दूध/दूध उत्पादों में मिलावट के मुद्दे पर कोई एडवाइजरी जारी नहीं की।” हमें 87% वाले दावे के समर्थन में WHO का कोई दस्तावेज नहीं मिला।

भारत सरकार के रिकॉर्ड क्या बताते हैं?

PIB ने 19 जनवरी 2023 को कहा कि 2025 तक 87% नागरिकों को कैंसर जैसी बीमारी होने वाली WHO एडवाइजरी की रिपोर्ट झूठी थी। उसी विज्ञप्ति में 2018 के राष्ट्रीय दूध-सुरक्षा सर्वेक्षण का संदर्भ दिया गया: 6,432 नमूनों में 12 नमूने ऐसे पाए गए जो मानव उपभोग के लिए असुरक्षित बनाने वाली मिलावट से जुड़े थे। यह पुराना सर्वेक्षण वर्तमान राष्ट्रीय अनुमान नहीं है, लेकिन इससे 87% का वायरल आँकड़ा भी साबित नहीं होता।

असल खाद्य-सुरक्षा चिंता अलग है

FSSAI दूध और दुग्ध-उत्पादों के मानक तथा परीक्षण विधियाँ प्रकाशित करता है। 2024–25 के सरकारी आँकड़ों में नमूनों और मामलों की संख्या दी गई है; “मानक के अनुरूप नहीं” का अर्थ कैंसर का निदान या कारण सिद्ध होना नहीं है। संदिग्ध मिलावट की शिकायत राज्य खाद्य-सुरक्षा अधिकारी या FSSAI के उपभोक्ता चैनल से करें, वायरल घरेलू वीडियो पर निर्भर न रहें।

दावा और सबूत

  • गलत: WHO ने 87% भारतीयों को मिलावटी दूध से कैंसर होने की चेतावनी दी।
  • पुष्ट: WHO का आधिकारिक स्पष्टीकरण ऐसी एडवाइजरी से इनकार करता है।
  • पुष्ट: PIB ने 19 जनवरी 2023 को दावे को खारिज किया।
  • संदर्भ: खाद्य-सुरक्षा उल्लंघन वास्तविक हो सकते हैं, पर उनसे राष्ट्रीय कैंसर-पूर्वानुमान नहीं बनता।

निष्कर्ष

WHO की कथित चेतावनी गढ़ी हुई है। खाद्य-सुरक्षा जाँच और कार्रवाई जरूरी हैं, लेकिन 87% कैंसर का दावा सबूतों से समर्थित नहीं है। महत्वपूर्ण स्वास्थ्य दावों को मूल स्रोतों से जाँचें और किसी गंभीर निर्णय से पहले अपना विवेक इस्तेमाल करें।

स्रोत

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