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पीसीओ अब संपर्क का मुख्य साधन नहीं है, फिर भी ट्राई ने 2025 में 7,901 पीसीओ गिने। इंटरनेट सदस्यता एक अरब पार है, लेकिन निजी, किफायती और उपयोगी पहुंच अलग सवाल है।

Switch to शॉर्ट्स

सार्वजनिक टेलीफोन बूथ अब रोजमर्रा के संवाद का केंद्र नहीं है। फिर भी यह नियामक के आंकड़ों से गायब नहीं हुआ है: दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अप्रैल–जून 2025 तिमाही में 7,901 पब्लिक कॉल ऑफिस (पीसीओ) दर्ज किए। उसी तिमाही में भारत में 1,002.85 मिलियन इंटरनेट सदस्यताएं थीं। असली सवाल यह नहीं है कि फोन ने बूथ की जगह ली या नहीं; सवाल यह है कि फॉर्म, ओटीपी या भुगतान के समय कनेक्शन निजी, किफायती और इस्तेमाल लायक है या नहीं।

60 सेकंड में पूरी बात

  • जून 2025 के अंत तक ट्राई ने 1,002.85 मिलियन इंटरनेट सदस्यताएं दर्ज कीं; इनमें 958.14 मिलियन वायरलेस थीं।
  • उसी आधिकारिक आंकड़े में 7,901 पीसीओ भी हैं, इसलिए साझा कॉल सुविधा कुछ जगहों पर अब भी सेवा तंत्र का हिस्सा है।
  • शहरी टेली-डेंसिटी 133.56% और ग्रामीण टेली-डेंसिटी 59.43% थी। यह प्रति 100 लोगों पर सदस्यता है, निजी फोन रखने वालों की गिनती नहीं।
  • राष्ट्रीय आंकड़े यह नहीं बताते कि किसके पास निजी फोन, डेटा, चार्जिंग, पढ़ने की क्षमता या सुरक्षित जगह है।
  • कई परिवारों के लिए भरोसेमंद व्यक्ति, अच्छा सिग्नल और समय पर मदद अब भी डिजिटल सेवा तक पहुंच का हिस्सा हैं।

राष्ट्रीय छलांग, स्थानीय अंतर

ट्राई के आंकड़े बड़े पैमाने का संकेत देते हैं: 1,218.36 मिलियन टेलीफोन सदस्य और एक अरब से अधिक इंटरनेट सदस्यताएं। पर शहरी और ग्रामीण आंकड़ों को एक जैसा नहीं पढ़ा जा सकता। शहरी टेली-डेंसिटी 133.56% और ग्रामीण 59.43% थी। 100% से अधिक आंकड़ा एक व्यक्ति के कई कनेक्शन दिखा सकता है; इसका अर्थ यह नहीं कि हर निवासी के पास चालू निजी हैंडसेट है।

ट्राई अप्रैल–जून 2025: 1,002.85 मिलियन इंटरनेट सदस्यताएं, 7,901 पीसीओ, शहरी टेली-डेंसिटी 133.56% और ग्रामीण 59.43%
Chart राष्ट्रीय सदस्यता का बड़ा आंकड़ा शहरी-ग्रामीण पहुंच अंतर को खत्म नहीं करता। स्रोत: ट्राई, अप्रैल–जून 2025। हेडलाइनडिकोडेड दृश्य। Source/credit: ट्राई आंकड़ों पर हेडलाइनडिकोडेड दृश्य

ग्रामीण आंकड़ा यह प्रमाण नहीं है कि गांव ऑफलाइन हैं, और शहरी आंकड़ा यह प्रमाण नहीं है कि हर घर में बराबर पहुंच है। यह केवल चेतावनी देता है कि राष्ट्रीय सदस्यता को किसी व्यक्ति की सेवा पूरी करने की क्षमता न माना जाए।

पीसीओ की गिनती क्यों मायने रखती है

पीसीओ ने संवाद को साझा और दिखने वाली सेवा बनाया था: कोई काउंटर तक जाता, भुगतान करता और लैंडलाइन से कॉल करता। स्मार्टफोन ने टिकट, संदेश और भुगतान को निजी उपकरण में पहुंचाया। इससे काम तेज हुआ, लेकिन बैटरी, कमजोर सिग्नल, दस्तावेज या अनजान स्क्रीन की जिम्मेदारी परिवार पर आ सकती है।

7,901 का आंकड़ा पीसीओ के पुराने समय को बेहतर नहीं ठहराता। लेकिन यह दिखाता है कि हर व्यक्ति के पास निजी फोन और लगातार डेटा होने की धारणा से लोग परिवार, दुकानदार, ऑपरेटर या स्थानीय सेवा केंद्र की मदद पर निर्भर हो सकते हैं।

एआई-निर्मित संपादकीय चित्रण: छोटे शहर के सेवा डेस्क पर दुकानदार एक बुजुर्ग महिला को स्मार्टफोन चलाने में मदद करता है
Ai Generated एआई-निर्मित संपादकीय चित्रण, किसी वास्तविक घटना की तस्वीर नहीं। उपकरण या कनेक्शन के साथ सहायता भी जरूरी हो सकती है। Source/credit: ओपनएआई इमेज जनरेशन से हेडलाइनडिकोडेड संपादकीय चित्रण

रोजमर्रा के पाठक के लिए क्या बदला

  • आवेदन और ओटीपी: समय-सीमा वाले काम में ऐसा नंबर रखें जो संदेश ले सके और नियम अनुमति दें तो दूसरा संपर्क रास्ता भी रखें।
  • साझा उपकरण: मदद लेने के बाद पासवर्ड, पिन या पहचान दस्तावेज सेव न रहने दें। हेल्पर से साइन आउट और डाउनलोड हटाने को कहें।
  • यात्रा और भुगतान: लेनदेन की मंजूरी से पहले रकम और प्राप्तकर्ता स्वयं जांचें।
  • स्थानीय सवाल: नेटवर्क, चार्जिंग और सहायता केंद्र की उपलब्धता जिले के स्तर पर मायने रखती है।

ये आंकड़े क्या नहीं बताते

ट्राई की तालिका डिजिटल साक्षरता, दिव्यांगजन पहुंच, उपकरण पर नियंत्रण, खर्च, साझा घर की निजता या किसी एक गांव के सिग्नल की गुणवत्ता नहीं मापती। इसलिए यह साबित नहीं करती कि हर व्यक्ति हर ऑनलाइन सेवा तक अर्थपूर्ण पहुंच रखता है।

स्रोत और तरीका

सीरीज़ में आगे

मनी ऑर्डर से यूपीआई तक परिवारों के पैसे भेजने का बदलाव समझाता है, और रिजर्वेशन काउंटर से रेल ऐप तक यात्रा योजना में आए बदलाव को देखता है।

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