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1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G ने मनरेगा की जगह ली। प्रति ग्रामीण परिवार गारंटी 125 दिन हुई, 15-दिन वाला काम का अधिकार जारी रहा; फंडिंग और मौसमी विराम के नियम बदले हैं।

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1 जुलाई 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त कर विकास भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM G लागू हुआ। यह केवल नाम बदलना नहीं है। नया कानून हर ग्रामीण परिवार को अधिकतम 125 दिन अकुशल शारीरिक काम की गारंटी देता है, लेकिन वित्तपोषण बदलता है और अधिसूचित कृषि मौसम में काम रोकने की अनुमति भी देता है।

60 सेकंड में उत्तर

  • नया कानून: अधिनियम 36, 2025 ने 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह ली।
  • 125 दिन: गारंटी 100 से 125 दिन हुई, पर यह प्रति ग्रामीण परिवार है—हर वयस्क के लिए अलग 125 दिन नहीं।
  • 15-दिन नियम जारी: पुराने मनरेगा कानून में भी 15 दिन में काम और पात्र होने पर बेरोजगारी भत्ता था। नया कानून इसे जारी रखता है; पहली बार नहीं बनाता।
  • फंडिंग बदली: सामान्यतः केंद्र–राज्य अनुपात 60:40 और तय पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 है। मानक आवंटन से ऊपर का खर्च राज्य उठाता है।
  • मौसमी विराम: बुवाई और कटाई के चरम समय में कुल 60 दिन तक कार्यक्रम कार्य रोके जा सकते हैं।
मनरेगा और VB-G RAM G में दिनों, फंडिंग, 15-दिन नियम और मौसमी विराम की तुलना
Diagram दिन बढ़े, साथ में फंडिंग और मौसमी संचालन भी बदला। Source/credit: HeadlineDecoded ग्राफिक

1 जुलाई को कानूनी रूप से क्या बदला

संसद ने दिसंबर 2025 में कानून पारित किया। इंडिया कोड इसे 2025 का अधिनियम 36 दर्ज करता है। धारा 37 निरसन, बचाव और संक्रमण से संबंधित है। पुराने रिकॉर्ड और देनदारियां एक रात में गायब मानना सही नहीं; उन्हें कानून और संक्रमण नियमों के अनुसार संभाला जाना है।

परिवार अपने पंजीकरण और जॉब कार्ड की मौजूदा स्थिति ग्राम पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी से जांचे। आधिकारिक प्रक्रिया जांचे बिना कार्ड “बदलवाने” के लिए किसी एजेंट को पैसे न दें।

125 दिन का सही अर्थ

वित्त वर्ष में 125 दिन की सीमा उस ग्रामीण परिवार के लिए है जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक काम करना चाहते हैं। दो वयस्क वाले परिवार को अपने-आप 125-125 दिन नहीं मिलते। यह स्वतः नकद भुगतान भी नहीं है; काम की मांग दर्ज करनी होती है।

कार्य जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण ढांचा, आजीविका-संबंधी ढांचा और चरम मौसम के प्रभाव घटाने जैसे क्षेत्रों में नियोजित हैं।

15-दिन की सुरक्षा नई नहीं है

मनरेगा में भी आवेदन के 15 दिन के भीतर रोजगार और धारा 7 के तहत बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था। नया कानून यह सुरक्षा जारी रखता है। दोनों व्यवस्थाओं में बेरोजगारी भत्ता राज्य की देनदारी है—यह पूरी तरह केंद्र का नया खर्च नहीं है।

मौखिक मांग साबित करना कठिन है। लिखित या आधिकारिक रूप से दर्ज मांग की तारीख लगी पावती रखें।

लिखित मांग, तारीख लगी रसीद, 15 दिन और काम न मिलने पर भत्ता या शिकायत की समयरेखा
Diagram तारीख लगी पावती 15-दिन अवधि का सबसे अहम प्रमाण है। Source/credit: HeadlineDecoded ग्राफिक

बड़ा ढांचागत बदलाव: भुगतान कौन करता है

मनरेगा कोई सीधा 90:10 कार्यक्रम नहीं था। केंद्र सभी अकुशल मजदूरी, सामग्री लागत का अधिकतम तीन-चौथाई और प्रशासन का हिस्सा देता था; राज्य बाकी सामग्री हिस्सा, बेरोजगारी भत्ता और तय मुआवजा देते थे।

VB-G RAM G में सामान्यतः 60:40 लागत साझेदारी, तय पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 और बिना विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए पूरा केंद्रीय वित्तपोषण है। केंद्र राज्य का मानक आवंटन तय करता है; उससे ऊपर का खर्च राज्य उठाता है। इससे ऊंची मांग पूरी होने को लेकर वास्तविक नीतिगत सवाल उठता है, लेकिन अभी यह तथ्य कहना जल्दबाजी होगा कि राज्य काम जरूर सीमित करेंगे।

60 दिन का कृषि-मौसम विराम

राज्य बुवाई या कटाई के चरम समय में वित्त वर्ष में कुल 60 दिन तक कार्यक्रम कार्य न कराने की अवधि अधिसूचित कर सकता है। मजदूर स्थानीय अधिसूचना और पहले जमा आवेदन पर उसके प्रभाव की लिखित जानकारी मांगें; केवल मौखिक इनकार पर निर्भर न रहें।

बजट के दो आंकड़े

2026–27 में VB-G RAM G के लिए ₹95,692 करोड़ और पुराने MGNREGS मद में ₹30,000 करोड़ रखे गए। दूसरा आंकड़ा अलग जारी रोजगार गारंटी नहीं है; बजट विश्लेषण इसे संक्रमण और पुरानी प्रतिबद्धताओं के निपटारे से जोड़ता है।

मजदूर अब क्या करें

  1. ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में परिवार का पंजीकरण और जॉब कार्ड विवरण जांचें।
  2. मान्य माध्यम से काम की मांग दें और तारीख लगी पावती रखें।
  3. 15 दिन की लागू अवधि गिनें और देखें कि कोई अधिसूचित मौसमी विराम लागू है या नहीं।
  4. काम न मिलने पर कार्यक्रम अधिकारी से बेरोजगारी भत्ता और दर्ज कारण लिखित में पूछें।
  5. मांग, रसीद, जॉब कार्ड प्रविष्टि, मस्टर रोल और बैंक रिकॉर्ड के साथ शिकायत प्रक्रिया व सोशल ऑडिट का उपयोग करें।

दावा बनाम प्रमाण

  • पुष्ट: 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह नया कानून लागू हुआ।
  • पुष्ट: सीमा प्रति ग्रामीण परिवार 125 दिन है।
  • सुधार: 15-दिन नियम और बेरोजगारी भत्ता पुराने कानून में भी थे।
  • सुधार: मनरेगा में सीधा 90:10 अनुपात नहीं था और बेरोजगारी भत्ता पूरी तरह केंद्र नहीं देता था।
  • अभी अपुष्ट: नई फंडिंग से वास्तविक काम के दिन बढ़ेंगे या घटेंगे; इसके लिए कार्यान्वयन डेटा चाहिए।

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स्रोत

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